बुधवार, 24 मार्च 2021

Aaj ka Din ।। metro ki cross seat ।। Bolte Panne

                                            हर शाम घर लौटने के बाद कोई न कोई ये सवाल जरूर आपसे पूछता होगा.. तो कैसा रहा आज का दिन? हम भी बस यही पूछ रहे हैं। ''बस, अच्छा....'' कहकर सवाल को दफा कर देने वाले अंदाज से बाहर आकर क्या आप हमें कुछ ऐसा बता सकते हैं ..अपने दिन के बारे में जो कुछ यादगार बन जाए हम सबके लिए?? हर नया दिन अलग ही होता है, जरूरी नहीं आपका आज का दिन अच्छा ही हो...अनुभव हंसाने वाला ही हो या कुछ सिखाने वाला ही। आपका दिन जैसा भी गया हो, उसमें अगर कुछ नयापन था... तो जरूर वह सुनाने लायक रहा होगा... तो फिर हमें सुनाइए न। इंतजार रहेगा आपके दिन से जुड़े किस्से का हमें । आज सुनिए शिवांगी के दिन का हाल ।

शुक्रवार, 12 मार्च 2021

Derail_railways।। Research Engine by Gajendra Ricky ।। Podcast 01

                                           

बोलते पन्ने पॉडकास्ट ‘रिसर्च इंजन’ आपके लिए लेकर आया है...‘डीरेल_रेलवेज’। इस पॉडकास्ट में गजेंद्र रिक्की बता रहे हैं डीरेल हो चुके रेलवे का हाल। सरकार चोरी-छिपे पैसेंजर ट्रेनों का किराया, प्लेटफॉर्म टिकट जैसे सुविधाओं का महंगा कर रही है। देश के इस सबसे बड़े रीक्रूटर ने क्यों नौकरियों को हॉल्ट कर रखा है, रेलवे का सफर अब कितना सुरक्षित बचा...ऐसे ही जरूरी सवालों का जवाब जानिए रिसर्च पर आधारित इस पॉडकास्ट के जरिए। पत्रकार गजेंद्र रिक्की ने ये जानकारी जुटाकर आप तक पहुंचायी हैं। आज से हर शनिवार आपके लिए रिसर्च इंजन लाएगा आपसे ही जुड़े किसी एक मुद्दे की डिटेल में जानकारी।

गुरुवार, 11 मार्च 2021

लोकतांत्रिक देश ऐसे बनते ऑटोक्रेसी

 - शासक सरकार सबसे पहले मीडिया को निशाना बनाती है फिर सिविल सोसायटी को।

- उसके बाद विपक्ष का सम्मान न करने की रणनीति अपनाकर समाज में ध्रुवीकरण पैदा करती है।

- फिर फर्जी सूचनाएं फैलाने का तंत्र बनाती है और सरकारी संस्थानों को कमजोर करती है।



अगर आप इन तीनों बिंदुओं को पढ़ते हुए भारत की स्थिति के बारे में सोच रहे हैं तो आप सही हैं। दरअसल, दुनिया में लोकतंत्रों पर नजर रखने वाली एक वैश्विक संस्था ‘वी-डैम’ (वैरायटी इन डेमोक्रेसी ) ने 144 देशों की रिपोर्ट में बताया है कि भारत अब अपना चुनावी लोकतंत्र का दर्जा खो चुका है, वह अब एक चुनावी एकतंत्र या इलेक्टोरल ऑटोक्रेसी है। इसी संदर्भ में वी-डैम ने एक पैटर्न के बारे में बताया है जो उन्होंने दुनिया के सभी 87 ऑटोक्रेसी देशों में पाया। पैटर्न बताता है कि एक लोकतंत्र में जनता द्वारा चुना गया नेता किस तरह सर्वशक्तिमान बन जाता है। इसी पैटर्न से जुड़े तीन प्वाइंट आपने पोस्ट की शुरूआत में पढ़े। इस संस्था ने यह भी पाया कि पिछले दस साल में पूरी दुनिया में उदारवादी लोकतंत्र कमजोर हुए हैं।
- शिवांगी

Research Engine - Trailer ।। By : Gajendra Ricky ।। Bolte Panne Podcasts

                                               

  'रिसर्च इंजन' पर आप हर शनिवार सुनेंगे सुर्खियों से आगे की वो खबरें जो ब्रेकिंग न्यूज वाली पत्रकारिता में किनारे कर दी गईं, समाचार चैनलों की फटाफट खबरों में मार दी गईं या अखबार के पन्ने में सिंगल कॉलम भर छपी। ऐसी खबरों का आप तक पहुंचना ज़रूरी है.. ताकि आप सशक्त हों। ऐसे ही रिसर्च आधारित खबरें आप तक गजेंद्र रिक्की पहुंचाएंगे बोलते पन्ने पॉडकास्ट ‘रिसर्च इंजन’ के जरिए। पेशे से पत्रकार गजेंद्र रिक्की नौ साल से प्रिंट मीडिया की पत्रकारिता से जुड़े हैं।

रिपोर्ट: भारत अब लोकतंत्र नहीं, चुनावी एक-तंत्र




दुनिया की एक और प्रतिष्ठित संस्था ने अपनी रिपोर्ट में भारत के लोकतंत्र के स्टेटस को घटा दिया है। स्वीडन का एक स्वतंत्र रिसर्च संगठन वी-डैम (वैरायटी इन डेमोक्रेसी) ने बुधवार को जारी अपनी रिपोर्ट में कहा कि दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश भारत अब एक इलेक्टोरल ऑटोक्रेसी है। हिन्दी में इसे आप ‘चुनावी एकतंत्र’ या ‘चुनावी तानाशाही’ शब्द से परिभाषित कर सकते हैं।
हम पाकिस्तान को जिस गिरी हुई नजर से देखते हैं, इस प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय संस्था का कहना है कि सेंसरशिप के मामले में भारत स्थिति भी पाकिस्तान जैसी ही है। इतना ही नहीं, भारत की यह स्थिति उसके पड़ोसी देश नेपाल और बांग्लादेश के मुकाबले भी बदतर है। इस रिपोर्ट में बताया गया कि बीते साल लगभग हर लोकतांत्रिक देश में लोकतंत्र की स्थिति कमजोर हुई है, जिसमें सर्वाधिक निराशाजनक हालात भारत के हैं।
हिन्दी के अधिकांश प्रमुख अखबारो ने पिछले सप्ताह आयी ‘फ्रीडम वॉचडॉग’ की रिपोर्ट को नहीं छापा, जिसमें बताया गया कि भारत अब एक ‘आंशिक रूप से स्वतंत्र’ देश है। अमेरिकी सरकार की वित्तीय मदद पर चलने वाले इस संगठन को दुनिया का फ्रीडम वॉचडॉग कहा जाता है। इस संगठन ने भारत के स्वतंत्र देश के दर्जे को घटाकर उसे ‘पाटर्ली फ्री’ देश की श्रेणी में रख दिया।
ऑटोक्रेसी को जानिए : एकतंत्र या निरंकुशता का मतलब एक व्यक्ति के पास उस क्षेत्र या देश की असीमित विधायी और कार्यकारी शक्तियां होने से है।
आप अब भी भारत में लोकतंत्र के खात्मे पर रोने वालों को कोसते हैं तो अपने ऊपर जरूर विचार करें। प्रधानमंत्री के दिए परजीवी या आंदोलनजीवी शब्दों का खुद इस्तेमाल करने से पहले सोचें। यह देखे कि क्या आपको वो सहूलियतें मिल रही हैं जिसकी अपेक्षा आप एक लोकतांत्रिक, समाजवादी और धर्मनिरपेक्ष देश से करते हैं।
- शिवांगी Shivangi Friedi, बोलते पन्ने के लिए

बुधवार, 10 मार्च 2021

intezar ki amavasya ।। poem by Shivangi ।। Bolte Panne poem series : 01

                                      

इंतजार की अमावस्या .... 

बोलते पन्ने पर आप सुनेंगे विशेष कविता श्रृंखला। जिसमें पहली कविता शिवांगी की कलम से आप तक पहुंच रही है। पति के जाने के बाद के करवाचौथ को एक औरत किस तरह याद करती होगी, सुनिए ...। आप भी हमें अपनी कविताएं भेज सकते हैं, जिसे आप खुद पढ़ें या हमारे साथी आपको क्रेडिट करते हुए उसका वीडियो रूपांतरण प्रस्तुत करेंगे। शुक्रिया।