शुक्रवार, 28 मई 2021

कोरोना ने बदल दी सपनों की ‘दुनिया’ ।। Podcast by Shivangi ।। Bolte Panne...


आज भारत में पहली बार एक दिन के भीतर दो लाख संक्रमित मरीज मिले हैं। इतने डर वाले माहौल में क्या आप सही ढंग से सो पा रहे हैं? अगर हां, तो क्या आपको बहुत डरावने सपने आने लगे हैं? अगर आप भी सपने देखने के व्यवहार में बदलाव से जूझ रहे हैं तो सुनिए आज का पॉडकास्ट । इसे सुनते हुए याद रखिए कि कोरोनाकाल से पहले हम बहुत कम सपने देख रहे थे पर हमारे सपने देखने की तादाद में भी वृद्धि हुई है। इस पॉडकास्ट की रिसर्च और प्रस्तुति है शिवांगी की।

Immortal Identity : पहचान नहीं मिटती.. ।। Bolte Panne (शायरी-03)

 

 मरकर भी न मिटने वाली पहचान बनाने की चाहत हम सबके भीतर है। इसी चाहत को कलमबद्ध किया है शायर अमित कुमार ग्वाल ने। सुनिए ये शायरी और हमें फीडबैक दीजिए...। आप भी हमें अपनी कविताएं या शायरी भेज सकते हैं जिसे आपको क्रेडिट देते हुए प्रस्तुत किया जाएगा।
वीडियो क्रेडिट : बोलते पन्ने के लिए इस वीडियो का कैमरा फिल्मांकन किया हमारे साथी योगेश ने जबकि निर्देशन और प्रस्तुति अमित कुमार ग्वाल की है। बोलते पन्ने की हिन्दी कविता श्रृंखला की और कविताएं सुनने के लिए इस links पर जाइए The Final Destination : वो अंत कैसा होगा...?? https://youtu.be/8tvQNEqi1TY कैलेंडर का एक दिन घेर लेने भर से क्या होगा ? Poem by Prem Prakash https://youtu.be/2cK0z5PuGu8​ jeans wali ladhkiyan ।। by shivangi ।। जीन्स वाली लड़कियां https://youtu.be/QLdbc90E-4M​ Dangon ki aanch mein Romance ।। Poem by Vinod srivastava https://youtu.be/OlnLcAftGlA​ Kohra ।। Poem by Amit kmr Gwal https://youtu.be/9Wn9gnlBODs​ sapno ki belein ।। poem by Dev Vats https://youtu.be/-mafWcUJcQY​ Makkar Qalam ।। Poem by Shivangi https://youtu.be/iF6jkBAZ4oM​ ek roz kabhi mil jao na ।। poem by amit https://youtu.be/xuQftVzDIOA​ karwa chauth । करवाचौथ : इंतजार की अमावस्या https://youtu.be/-gTgWKFuUr8​ do chup zindagi ।। written and recited by Amit kmr Gwal https://youtu.be/9qQ-UThzkRs​ zindagi us mod tak ... ।। Poem by Amit kmr Gwal https://youtu.be/9pOMYu7Ab2M​ mera thikana।। poem by Amit kmr gwal https://youtu.be/zCCGxdnod34

सोमवार, 3 मई 2021

The Final Destination : वो अंत कैसा होगा...?? ।। Poem by Amitkmr Gwal (B...

                                          आने वाला हर नया साल हमारी उम्र बढ़ा जाता है पर कोई एक साल ऐसा भी आएगा जब इस क्रम का अंत होगा। वो अंत कैसा होगा...? यह प्रश्न हर इंसान का सामूहिक डर है जो कोरोनाकाल में और भी डरावना हो गया है। पर यह प्रश्न हम इंसानों को आज में जीने के लिए प्रेरित भी करता है।वक्त की जरूरत है कि हम इस प्रश्न से बचने के बजाय उसका डटकर सामना करें। आज अपने जन्मदिन के मौके पर अमित कुमार ग्वाल जो कविता लेकर आए हैं, वह यही संदेश देती है। 
बोलते पन्ने प्रोडक्शन की इस कविता में कैमरा फिल्मांकन हमारे साथी योगेश ने किया है। कविता वाचन, निर्देशन और संपादन अमित कुमार ग्वाल का है। बरेली के अमित पेशे से एक बैंकर और दिल से ‘थोड़े से शायर’ हैं। आप भी हमें अपनी कविता भेज सकते हैं जिसे आपको क्रेडिट देते हुए पेश किया जाएगा।