दिनेश जी की कविता 'आँसू' .... इस शब्द की सबसे सटीक परिभाषा है।
'आँसू'
जीवन संग जनमते आँसू,
आँसू से पहला परिचय है।
विवश नयन से बहने वाला
हर आँसू अपने आँसू है ।
चिर-परिचित मनमीत अपरिचित
मरे सकल संकल्प समर्पित
सम्बन्धों में नमक घुल गया
तो नमकीन बना आँसू है॥
निखर-निखर निर्झरनी आँखें
भीग-भीग उठती हैं पंखें
प्राण पाहुने पल-पल रोये
दृग में दर्द सना आँसू है ॥
आस-पास जब चाँद महकते
अन्तर्मन के घाव दहकते
बिखर गए मधुवंती सपने
हर बिखरा सपना आँसू है ॥
प्राणों में घुल गए धुंधलकते
फिर पलकों पर आँसू छलके
जीवन के दुखड़े धोने को
स्रष्टा की सृजना आँसू है ॥
'आँसू'
जीवन संग जनमते आँसू,
आँसू से पहला परिचय है।
विवश नयन से बहने वाला
हर आँसू अपने आँसू है ।
चिर-परिचित मनमीत अपरिचित
मरे सकल संकल्प समर्पित
सम्बन्धों में नमक घुल गया
तो नमकीन बना आँसू है॥
निखर-निखर निर्झरनी आँखें
भीग-भीग उठती हैं पंखें
प्राण पाहुने पल-पल रोये
दृग में दर्द सना आँसू है ॥
आस-पास जब चाँद महकते
अन्तर्मन के घाव दहकते
बिखर गए मधुवंती सपने
हर बिखरा सपना आँसू है ॥
प्राणों में घुल गए धुंधलकते
फिर पलकों पर आँसू छलके
जीवन के दुखड़े धोने को
स्रष्टा की सृजना आँसू है ॥
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