रोटी आज ‘सिर्फ दो वक्त की रोटी’ नहीं रही, बल्कि कहानी, कहावत, मजाक, फिल्म, रिश्ते और स्वाद का अनूठा उदाहरण बन चुकी है। राजनेता भी मौका मिलते ही न तो सियासत में तड़का लगा सकते हैं और न ही कोई और सियासी व्यंजन बना सकते हैं, वे सिर्फ और सिर्फ सियासी रोटी ही सेंक सकते हैं। आखिर ये रोटी किस तरह हमारी भोजन थाल तक पहुंची...?बोलते पन्ने पर दिल्ली के पत्रकार गजेंद्र रिक्की आपको रोटी के करीब 3500 साल पुराने सफर पर ले चलेंगे, जिससे रोटी के इतिहास की परतें खुलेंगी। सुनिए हमारा रिसर्च इंजन पॉडकास्ट ...
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